Wednesday, 14 September 2016

मैहर करों माता ब्रह्माणी

चिंता हरण , मंगल करण , विघन विडारण विख्यात ।
माँ ब्राह्मणी कष्ट निवारिणी , जय हो बायण मात ।।

ॐ नमो श्री जगदम्बा रूपम , शक्ति तू ज्योतिसरूपम ।
चित्तौड़ गढ़ वाली ऐ धनियाणी , मैहर करों माता ब्रह्माणी ।।
द्वापरयुग में माँ अवतार लियों , बाणासुर ने आप मारियों ।
दैत्यों ने हणती दयाळी , मैहर करों माता ब्रह्माणी ।।
आगे भेरू घुँघरिया घमकावे , हेलों सुण बायण दोड्या आवे ।
तीनों लोको में माँ बाजै ताळी , मैहर करो माता ब्रह्माणी ।।
अन्न धन रा भण्डार भराणी , वेदों में माँ तूँ वखाणी ।
देवी तूँ तो खूब दयाळी , मैहर करो माता ब्रह्माणी ।।
रुपाळ में माँ तूँ वरदायिनी , सहाय करें माता सुखदायिनी ।
हंस चढ़ आवो माँ भवानी ,  मैहर करों माता ब्रह्माणि ।।
पल पल में माँ वास थारों , नहीं कोई माँ तुज ती न्यारो ।
चवद ब्रह्माण्ड में शक्तिशाली , मैहर करों माता ब्रह्माणी ।।
विद्या रुपे विश्व विधाता , बाण आप ही बायण माता ।
भक्तों देवी नजरे भाळी , मैहर करो माता ब्रह्माणी ।।
मायड़ जग में नही कोई मारों , अब मावड़ी आप साम्भळो ।
पार करों माँ चार भुजाळी , मैहर करों माता ब्रह्माणी ।।
तूँ मायड़ म्हारी आराधा , यह कहे माता अनुराधा ।
महेंद्र सिंह गुणगावे माड़ी , मैहर करो माता ब्रह्माणी ।।

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Thursday, 8 September 2016

श्री बाण माताजी मन्दिर देचू

श्री बाण माताजी मन्दिर देचू

मित्रों श्री बाण माताजी भक्त मण्डल जोधपुर ( राज.) द्वारा हमेशा आपको श्री बाण माताजी के बारें में नई नई जानकारियां दी हैं , आज हम आज से लगभग 250-300 साल पूर्व देचू गाँव में निर्मित श्री बाण माताजी के मन्दिर के दर्शन कराते हैं ।
300 साल पूर्व देचू गाँव आसवतों की जागीर हुआ करता था , आसावत श्री बाण माताजी के अनन्य भक्त थे , दिन-रात माताजी की पूजा अर्चना आराधना किया करते थे ।
आसवतों की इस जागीर को चाहड़देव जी राठौड़ ने धोखे से छिन ली और यहाँ के ठाकुर बन गए ।
अपने कुल के भक्तों के साथ धोखा होने और पूजा पाट छोड़ने पर श्री बाण माताजी रुष्ठ हो गए और रात को चाहड़देव जी ने स्वप्न में देवी के दर्शन किये और मूर्ती खंडित होते हुए देखा , भयभीत चाहड़देव जी ने सुबह फिर से आसावतों को वो जागीर देने का आश्वासन देने और मन्दिर पूजा का भार सौपने भेजा , लेकिन आसावत राजपूतों ने यह कह कर मना कर दिया कि आप हमारे बेटी जंवाई हो हम यह जागीर वापस नही ले सकते लेकिन श्री बाण माताजी मन्दिर की पूजा की जिम्मेदारी हम लेते हैं और कुछ परिवार वही रुक गए और कुछ जोधपुर , जैसलमेर जाकर बस गए ।
जो देचू में ही रुके वे निरंतर पूजा करते रहे और आज वहाँ श्री बाण माताजी के मन्दिर के आगे विशाल भूमि पड़ी हैं ।
मन्दिर प्रांगण में विराजमान मूर्ती आज भी खंडित हैं जो चाहड़देव जी राठौड़ को स्वप्न में दिखी थी , मन्दिर एक छोटे से चबूतरे पर बना हुआ हैं जिसके चारों और बिजलीघर वालों ने माताजी के चमत्कार को देख यहाँ मन्दिर के चारों और परकोटा बनाया , हुआ यूँ कि मन्दिर के आगे पड़ी पूरी जमीन श्री बाण माताजी की हैं बिजलीघर बनाने वाले ठेकेदार ने काम शुरू कर दिया लेकिन काम आगे न बढ़ पाया और रात को माताजी ने उसे कुछ चेतना दी , सुबह कुछ बुजर्ग लोगो को पूछा जिससे उसे ज्ञात हुआ कि यहाँ देवी थान हैं , ठेकेदार ने दर्शन कर मन्नत  मांगी , मन्नत पूरी होने पर वह माताजी से प्रभावित हुआ और  उसने मन्दिर के चारो और परकोटा बनाया ।
मन्दिर में विराजमान श्री बाण माताजी ने भैंसे की असवारी कर बीस भुजा धारण किये हुए हैं ।
इस संदर्भ में रावो और भाटों की बही में लिखा हुआ  हैं जो श्री बाण माताजी के पूर्व अवतारों एवम् देचू स्थित मन्दिर के इतिहास को उजागर करता है:

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नख चौबीस साखरों शिशोदिया राणावत कुलदेवी सतयुग री आद आंबे...
कुलदेवी त्रेता जुग री अजेश्वरी राजा अज घर अवतार लियो , जीण सु अजेश्वरी कहलाई...
कुलदेवी कलयुग री बाणेश्वरी बप्पा रावल रे बाण ऊपर आसान राखता , जिणसूं बाणेश्वरी कहलाई...
वर देवी आसावतों री बीस भुजा देचू माते वरदान हुयी...

चबूतरे पर स्थित मन्दिर पूरी खंडहर अवस्था में पड़ा हैं , मन्दिर की देख रेख पहले भोपाजी किया करते थे अब उनकी उम्र हो जाने और शरीर स्वस्थ न रहने के कारण पूजा करने नही आ सकते लेकिन उनके घर से सुबह कोई एक आकर दीआं बाती करके जाता हैं , जब भी कोई श्री बाण माताजी के कुल के भक्त रामदेवरा जाए या देचू से होकर गुजरे तो यहाँ दर्शन जरूर करें । माँ ने तो अपना फर्ज निभाया और अपने कुल का पालन कर रही हैं , लेकिन हमारा कर्तव्य बनता हैं कि इस मन्दिर का पुनर्निर्माण कराए और माताजी सही रूप से फिर से विराजमान करें ।
मन्दिर देचू से रामदेवरा जाते समय बिच रास्ते में आता हैं देचू से 5 किलोमीटर की दुरी पर बिजलीघर बनाया हुआ हैं और एक विशाल पेड़ के निचे यह मन्दिर हैं , मन्दिर की जानकारी हेतु वहाँ बोर्ड भी लगा हुआ हैं ।

आसावत अड़थ्ड्या , कुण ले सार सँभाळ ।
विरद बढ़ाए बीस भुजाळी , चित्तौड़ गढ़ रुखाळ ।।
भैंसा पर बीस भुजाळी बैस , आवो तारण हार ।
तूँ रुठ्या जग रूठे , था शरणा माई संसार ।।
पैलां अम्बा अवतरि , दूजा जग अजेश्वरी ।
बाण पर बेह बप्पा रावल रे , मात कहलाई बाणेश्वरी ।।
आस काई उणरी करूँ , हैं जिणरे दो हाथ ।
मो लिधि शरण जिणरी , वा बीस भुजाळी मात ।।

● @[306557149512777:]
● जल्द ही मन्दिर कब बना और इसके बारें में अन्य जो भी जानकारी होगी आप तक पहुँचा दी जायेगी ।

आपके गाँव में भी मन्दिर हो तो हमे संपर्क करें और बताए और +918107023716 पर पूरी जानकारी फ़ोटो सहित भेज देवे ।
【  @[306557149512777:] 】

Friday, 2 September 2016

श्री बाण माताजी के दर्शनार्थ जाने वाले संघ

चलो बुलावा आया हैं , बाण मैया ने बुलाया हैं.....
दर्शन करने मैया के धाम चलों , बाण मैया का मेला आया हैं...

गत 15 वर्षों में चित्तौड़ गढ़ स्थित सिसोदिया गहलोत वंश की कुलस्वामिनि श्री बाण माताजी के दरबार में हजारों भक्तों का आना-जाना शुरू हो चुका हैं , इन विगत वर्षों में माताजी के कुल के भक्तों को पता लगने लगा हैं कि उनकी कुलदेवी श्री बाण माताजी ( चित्तौड़ गढ़ राय ) हैं । 15 साल पूर्व श्री बाण माताजी को कोई जनता तक नही था  , जहाँ अब राजस्थान , गुजरात , मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र से भक्त दर्शन हेतु ट्रेन , बस , कार या पैदल दर्शनार्थ आने लगे हैं , हर घर ,  हर गाँव में माताजी के मन्दिरों का निर्माण हो रहा हैं । वहाँ के स्थानीय निवासियों का कहना हैं कि आने वाले वर्षों में यह मन्दिर इतना मशहूर होगा कि यहा दर्शन करने हेतु पंक्ति में खड़ा होना पड़ेगा ।
यह तो बाण मैया का चमत्कार ही मानों ,  यहाँ स्वयं चित्तौड़ वासी जिस देवी का नाम नही जानते थे मन्दिर नही जानते थे , वही आज दूर दूर से आने वाले भक्तों को रास्ता बता बता कर थक गए हैं , मैया की लीला अपरम्पार हैं ।
मन्दिर में राजस्थान से कई जिलों से दर्शनार्थ हेतु भक्त मोटरसाइकिलों , बसों और पैदल आ रहे हैं जिसमे जोधपुर , बालोतरा , सिरोही व् पाली से अत्यधिक हैं ।
इस महीने एवम् अगले माह में श्री बाण माताजी के दरबार में आने वाले एवम् रवाना हो चुके संघो की सूचि :-

01 ) माँ बाणेश्वरी गहलोत भाईपा ग्रुप बालोतरा की अष्टम पद यात्रा श्री बाण माताजी के कुचेरा ( नागौर ) स्थित मन्दिर हेतु इस संघ की रवानगी 30 अगस्त को गांधीपुरा स्थित माली समाज भवन से गाजे-बाजे के साथ रवाना हुई ,  पावन पद यात्रा संघ में श्री बाण माता का भव्य रथ के साथ डीजे साउण्ड पर भजनों की प्रस्तुति के साथ बालोतरा के मुख्य मार्गो से गुजरता हुआ रवाना हुआ ।
02/09/2016 को संघ खेमे का कुआँ , जोधपुर में विश्राम करेगा ।
08 सितम्बर 2016 गुरूवार को सांय ' माँ बाणेश्वरी गहलोत भाईपा ग्रुप बालोतरा ' द्वारा विशाल भजन संध्या का आयोजन किया गया हैं जिसमे राजस्थान के भजन सम्राट ' प्रकाश माली एंड पार्टी ' अपने भव्य भजनों की प्रस्तुति देंगे ।
स्थान : श्री बाण माताजी मन्दिर , जोधा पालड़ी

02 ) श्री बाण माताजी नवयुवक मित्र मण्डल खिवान्दी द्वारा द्वितीय पैदल यात्रा संघ 30/08/2016 को मालियों की वाड़ी खिवान्दी से श्री बाण माताजी मन्दिर सुमेरपुर दर्शनार्थ हेतु पहुँचा , माली समाज द्वारा विशेष महाप्रसादी का भी आयोजन  किया गया था ।
आप की जानकारी के लिए बता दे कि खिवान्दी में भी श्री बाण माताजी के मन्दिर का नव निर्माण हो रहा हैं ।

03 ) श्री बाण माताजी मित्र मण्डल नितोड़ा द्वारा आयोजित श्री बाण माताजी मोटरसाइकिल यात्रा 1/11/2016 को प्रात: 7:15 बजे नितोड़ा से श्री बाण माताजी मन्दिर चित्तौड़गढ़ दर्शन हेतु प्रस्थान करेगी । इस श्री बाण माताजी मोटरसाइकिल यात्रा में भाग लेने वाले यात्रियों के लिए टी-शर्ट संघ द्वारा फ्री दिया जाएगा ।
नितोड़ा ( सिरोही ) से सीधा श्री बाण माताजी चित्तौड़गढ़ दर्शनार्थ , वहा से दर्शन कर चित्तौड़ से श्रीनाथ जी ( चारभुजा ) , श्री नामा माताजी ( देसूरी ) , श्री सोनाणा खेतलाजी सोनाणा ( जुनी धाम ) व् सारंगवास ( नवी धाम ) , श्री आशापुरा माताजी ( नाडोल ) से नितोड़ा ( सिरोही ) दो दिन व् एक रात के सिमित समय में पूरी होगी ।

जो भक्त भाग लेना चाहते हैं वे संपर्क करें :
श्री मोहन भाई :- 9998930050
श्री मगन भाई :- 9510938598

04 ) श्री बाण माताजी की 13वीं बार पैदल यात्रा संघ झाड़ौली से ( नियर पिंडवाड़ा ) से रवाना होगी ।

श्री बाणेश्वरी माताजी ,चित्तौड़गढ़ पावन पद यात्रा-२०१६

सिरोही व जालोर जिले में बाण माताजी चित्तौड़गढ़,सोनाणा खेतलाजी के लिए सबसे विशालतम्  पैदल यात्रा संघ

13वीं बार 05/11/2016से12/11/2016 तक

(झाडोली),सिरोही ,जालोर जिले के पिथापुरा,बडगाँव,पावटी,रामसीन,गुडा,मोहब्बतनगर,कालन्द्री,बरलुट,देलदर,वराडा,कैलाशनगर,जावाल,ऊड़,पाडीव,गोइली,रामपुरा,खांबल गांवो से चित्तौड़गढ दुर्ग 

आमंत्रण स्थल-: घाँची समाज भवन(वाव),झाडोली,तहसील -पिण्डवाड़ा, जिला -सिरोही

गायक -: रामेश्वर माली सेवाडी & ललिता पंवार एण्ड पार्टी

 विशेष -:चित्तौडगढ़ राजमहल के बहार चढावे बोले जायेंगे 9:30बजे 12/11/2016

 गायक -:किशोर पालीवाल एण्ड पार्टी सुमेरपुर

आयोजक  36 कौम श्री सिसोदिया गहलोत परिवार सिरोही व जालोर 


कार्यक्रम के संपर्क कर्ता -: नेनाराम घांची पाडीव(09461064210),धनराजभाई सिरोही(09460123812),रमेशभाई झाडोली(09869520611)

05 ) श्री बाण माताजी भक्त मण्डल जोधपुर द्वारा भी जल्द ही चतुर्थ दर्शन यात्रा संघ का आयोजन किया जायेगा जिसकी पूरी सुचना आपको तैयार होते ही आप तक पहुँचा दी जायेगी ।

● पैदल जाने वाले इन सभी भक्तों का हौसला बढ़ाए एवम् जो भक्त इन संघो से जुड़ना चाहता हैं वह संपर्क कर मातेश्वरी के दर्शन हेतु पधारे ।

इन सभी पैदल , मोटरसाइकिल व् बस के माध्यम से जाने वाले संघो व् भक्तों को @[306557149512777:] द्वारा मंगलयात्रा की कामना एवम् हार्दिक शुभकामनाएँ श्री बाण माताजी आपके मनोरथ पूर्ण करें व् अपनी छतर छाँव हमेशा आप रखे ।

● नोट : अगर आपके गांव से श्री बाण माताजी दर्शनार्थ हेतु संघ जाने वाला हैं तो हमे संपर्क कर बताए ताकि माताजी के भक्तों को भी लाभ मिल सके , जो जुड़ना चाहे वो जुड़ सके ।
संपर्क : - +918107023716 ( श्री बाण माताजी भक्त मण्डल जोधपुर ( राज.)
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*माँ बायण करती जगत भलो , दर्शन को गढ़ चित्तौड़ चलो*

शुभेच्छुक : @[306557149512777:]

जय श्री बाण माताजी
जय श्री सोनाणा खेतलाजी
जय बाबा री
जय एकलिंग नाथ जी

Monday, 29 August 2016

श्री बाण माताजी महिमा 02

साँस साँस माँ री ऋणी , अपार हैं उपकार |
चाकर सेवा में राखजै , लेसु जनम हजार ||
माँ बायण री ममता में , फले फुले संसार |
आ धरती बायण बिना , लागे हैं बेकार ||
बायण चरणा में मिले , हर तीरथ रो वास |
बायण सु म्हाने मिलियों , अद्भुत प्रेम अहसास ||
साँचो सेवक आपरो , हर दिन करें अरदास |
पकड़ बाँह बाळक री , रेजो हरदम पास ||
चित्तौड़ गढ़ वाली मावड़ी , देदो एक वरदान |
बायण चरणा चित लागि रहे , धरु पल-पल ध्यान ||
चार भुजा अति सोभणि , अद्भुत रूप अनूप |
थारी महिमा गा रह्या , सुर सन्त महाभूप ||
माँ मन री सब जाणती , हियो ज्यारों अनमोल |
सेवक आशा पुरजे , पुरों खजानो खोल ||

श्री बाण माताजी सुप्रसन्न
श्री बायण माता सदा सहाय
श्री ब्राह्मणी माता प्रसन्नोस्तु
श्री बाणेश्वरी दैव्ये नम:

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Sunday, 28 August 2016

श्री बाण माताजी महिमा 01

बायण माँ की भक्ति करों , रोज नवाओं शीश |
ख़ुशी होय माँ देवसी , लाखों सुख आशीष ||
धणियाणी चित्तौड़ री , ऊँची ज्यारि शान |
हंस सवारी सोवणि , हाथा धनुष - बाण ||
सुर नर करें सेवना , ध्यावे नित महेश |
ब्रह्मा , विष्णु सेवा खड़ा , पाणी भरे इन्द्रेश ||
ध्यावे जो भी ध्यान सु , सारे उणरा काम |
दीन दुखिया नित आवता , गढ़ चित्तौड़ धाम ||
माँ बायण करती सदा , भव सागर सु पार |
इणरी थे सेवा करों , देसी जीवन तार ||
बायण मोटी मावड़ी , इणसूं बढ़ न कोय |
जो इणरी भक्ति करें , सुख संपति सामी जोय ||
माँ बायण रे आशीष सु , बणिया मोटा महिपाल |
सहाय करण स्वयं आई , इणसो नही प्रतिपाल ||
भू मण्डल पातळ में , चावी चारों ओर |
संकट इण सामी नी टिके , लगाले पुरो जोर ||
माँ बिन नही मैं जीवसु , भुंडा होसी हाल |
सेवा चरणा हित राखजै , कह रह्यो थारो लाल ||
जोधाणा रे मायने , बेठी बायण मात |
खेतलाजी हैं लाडला , रामदे सदा साथ ||
अनुराधा माँ अरज करें , नित गावे गुणगाण |
बायण बायण नित रटे , दूजो आवे न जुबाण ||

श्री बाण माताजी प्रसन्न
श्री बायण माता सदा सहाय
श्री ब्राह्मणी माँ प्रसन्नोस्तु
श्री बाणेश्वरी दैव्ये नम:

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Saturday, 27 August 2016

माँ बायण की महिमा

सेवक की सुन मेरी कुल माता हाथ जोड तेरे द्वार खडे ।।
धूप दीप नारियल ले हम माँ बायण की भेट धरें ।।
सिसोदिया गहलोत कुल की कुलदेवी माँ हो खुश हम पे कृपा करे ।
सुन मेरी माता तुम सुख दाता , कष्ट हमारे दूर करे ।।
बुद्दि विधाता तुम कुल माता , हम सब का उद्धार करे ।
चरण शरण का लिया आसरा तेरी कृपा से काज सरे ।।
बॉह पकड कर आप उठाओ , हम शरण तेरी आन पडे ।
जब भीड पडे भक्तो पर , तब माँ बायण सहाय करे ।।
हंस आरूढ़ होय अम्बिका राणा हमीर री सहाय करे ।
जंग जिता राज दिलाया , महाराणा पदवी राण धरे ।।
कन्याकुमारी अर वरदायिनी , माँ तुमने ही रूप धरे ।
दोष न देख अपना लेना , अच्छे बुरे पूत हम तरे ।।
माँ बायण की महिमा जो गावे , माँ उसके भण्डार भरे ।
दर्शन ताहिं जो नर आवे , माँ उसकी मंशा पूरी करे ।।
कुलदेवी को जो ध्यावे , माँ उसके कुल में वृद्दि करे ।
कलि में कष्ट मिटेगें सारे , माँ की जो जयकार करे ।।

श्री बाण माताजी प्रसन्न
श्री बायण माता सदा सहाय
श्री ब्राह्मणी माता प्रसन्नोस्तु
श्री बाणेश्वरी दैव्ये नम:

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मन मायड़ रे ममता भरी.....

मन  मायड़ रे ममता भरी , आँचल में आशीष |
आप समान दूजो नही , चरण नवाऊँ शीश ||
कटक सो संसार हैं , टिके न कठै पाँव |
अपनापन आप बिना , बायण बिन न ठाव ||
भूखा ने भोजन दीयों , निर्धनिया ने धन |
प्रेम पायों सब जुगत रा , अद्भुत थारो मन ||
सब संकट सु टारने , म्हाने लीन्हों पाल |
ऋण थारो चुके किया , सोचे थारो लाल ||
स्वारथ हैं ना कोई , ना कोई हैं व्यापार |
मायड़ वाळो प्रेम हैं , शीतल सुखद बयार ||
बायण ने जो पूजता , हिये उजाळो होय |
महिमा वर्णन कर सके , एसो जन्मियों न कोय ||
अनुराधा गुण गावती , अटूट हैं थासु प्यार |
शरणा नित म्हाने राखजो , एक थारो आधार ||

श्री बाण माताजी सदा प्रसन्न
श्री बायण माता सदा सहाय
श्री ब्राह्मणी माता प्रसन्नोस्तु
श्री बाणेश्वरी दैव्ये: नम:

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कुलदेवता श्री सोनाणा खेतलाजी का संक्षिप्त इतिहास

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