Monday, 14 November 2016

Shree Ban Mataji Dohe 05

वंदन करूँ वरदायिनी , करजे मो कल्याण |
चरणा में सेवा नित करूँ , धरूँ हमेशा ध्यान ||

श्री बायण माताजी रे चरणों री रज , मस्तक पर लगाऊ |
भक्तिं करूँ हमेशा मैया तेरी , सब देवा में तुझे मनाऊँ ||

नमो माता ब्राह्मणी , धराऊँ सोळाह श्रृंगार |
मन मंदिर में आप बसों , उपजे शुद्ध विचार ||

आदि शक्ति की वंदना , करके शीश नवाऊँ |
भक्त भवानी का रिश्ता पुराना , नित उठ गुण गाऊँ ||

क्षमा करो अपराध को , जान मुझे अंजान |
चरणा की रज चाहता हूँ , मैं बालक नादान ||

|| जय श्री बाण माताजी ||

Friday, 4 November 2016

श्री बाण माताजी मंदिर गोयली

श्री बाण माताजी मंदिर गोयली ( सिरोही , राज.)

चित्तौड़गढ़ में बेसणो , सिसोदिया शरताज |
यज्ञ कुंड सु प्रकट्या , राखी हमीर री लाज ||

Wednesday, 2 November 2016

नमामि भक्त तारिणी

बाण बायण ब्राह्मणी , धनुष-बाण धारिणी |
चित्तौड़गढ़ की धणियाणी , नमामि भक्त तारिणी ||
मधु-कैटप संहार के , सहाय करण अवतार ले |
भूमि भार कम कियो , बाणासुर मार के ||
कष्ट सब निवारिणी , शस्त्र हस्त धारिणी |
चित्तौड़गढ़ की धणियाणी , नमामि भक्त तारिणी ||
चार भुजा धार के , हंस सवार हो गई |
याद किया जिसने दुःख में , विपदा उसकी मिट गई ||
सीस मुकुट धारिणी , कष्ट कलेश निवारिणी |
चित्तौड़गढ़ की धणियाणी ,नमामि भक्त तारिणी ||
बाणासुर संहार को , कन्या कुमारी रूप धरा |
बन वरदायिनी त्रेतायुग में , पांडवो का दुःख हरा ||
पुष्पमाल कारिणी , शंख को फुकारिणी |
चित्तौड़गढ़ की धणियाणी , नमामि भक्त तारिणी ||
सिंह पे सवार होके , नेत्र जब हिला दिया |
इस धरा के दानवों को , धूल में मिला दिया ||
सदा ही शुभविचारिणी , सकल विघ्न टारिणी |
चित्तौड़गढ़ की धणियाणी , नमामि भक्त तारिणी ||
सुपारी, पान, लौंग, भेंट, नारियल के संग में |
पग पायल पीला वस्त्र , श्री बायण के अंग में ||
मम सदा निहारिणी , अरि का रक्त चारिणी |
चित्तौड़गढ़ की धणियाणी ,नमामि भक्त तारिणी||

जय माँ बायण

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Saturday, 29 October 2016

नमो बाणेश्वरी माता बाण

तुही आदि अन्नादि वाणी विधाता , तुंही रिद्धि सिद्धि नवनिद्धि दाता |
वदे क्रोड़ सुर तेतीस आह्वाण , नमो बाणेश्वरी माता बाण ||

कळा चंद्र ज्योति झळेळ कपाळ , वळे कुंडळ कान शोभत माळ |
बैठी गढ़ चित्तौड़ धनुष-बाण ताण , नमो बाणेश्वरी माता बाण ||

वंदन करूँ मेवाड़ी मात , हरदम रेहिजे म्हारे साथ |
संकट सब माँ बायण टाळ , नमो बाणेश्वरी माता बाण ||

कई दैत्य मार दळ झेर कीधा , देवी भक्ता ने सुख आणंद दीधा |
जो ध्यावे मिळे खुशियां री खाण , नमो बाणेश्वरी माता बाण ||

बप्पा रावल रे सेव माँ आवी , राज मेवाड़ी आप दिरावी |
गुहिलोतों रो आप बढ़ायों माण , नमो बाणेश्वरी माता बाण ||

सुर तेतिसा बन्द छुड़ावै , मात बायण री महिमा गावै |
ध्यावे मेवाड़ी महाराण , नमो बाणेश्वरी माता बाण ||

दुःख दाळद माँ दूर करती , अन्न-धन्न रा भंडार भरती |
भव में करें भक्तो कल्याण , नमो बाणेश्वरी माता बाण ||

ज्यो अम्बिका त्रयंबका जोगमाया , परा पार ॐकार पारं न पाया |
पायो न पार होवे ना बखाण , नमो बायणेश्वरी माता बाण ||

सेवकिया री आवों आराधा , भक्तों में प्यारी अनुराधा |
महेंद्र सिंह करें गुणगाण , नमो बाणेश्वरी माता बाण ||

🚩 आवों आह्वाण , मातेश्वरी बाण 🚩

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Friday, 28 October 2016

जयति जयति श्री बाण ब्राह्मणी

जय जय श्री चित्तौड़ धणीयाणी , जयति जयति श्री बाण ब्राह्मणी |
जयति श्री बायण भव भयहारी , जयति मात बायण बलकारी |
जयति मात-बायण विख्याता , जयति सर्व श्री बायण सुखदाता |
बायण रूप कियो माँ धारण , भव के भार उतारण कारण |
बायण नाम सुनी हवै भय दुरी , सब विधि होय कामना पूरी |
ब्रह्मा विष्णु महेश गुण गायो , ब्रह्माणी माँ रूप धरायों |
मात ब्राह्मणी हंस विराजत , चार भुजा माँ के अति साजत |
पग पायल बायण रे बाजत , दर्शन कर सकल भय भाजत |
मात बायण बाणासुर मारियों , सब सुर संता रो काज सारियो |
राणा लक्ष्मण स्वप्न में काली , दीन्हों वर राख्यों माँ लाली |
धिन धिन बायण माँ भय भंजन , जय बाणेश्वरी खल दल भंजन |
कर में मात धनुष-बाण साजे , चित्तौड़गढ़ में बायण बिराजै |
जो बायण निर्भय गुण गावत , अष्टसिद्धि नव निधि फल पावत |
रूप विकराळ कठिन दुःख मोचन , माँ ममता भरी दोनु लोचन |
भुत पिचाश दैत्य सब डोलत , नाम बायण सेवक मुख बोलत |
महामाया आप कन्याकुमारी , तीनूं लोक में महिमा थारी |
बायण माता आप ब्रह्माणी , वेदों में माँ बाण बखाणी |
अन्धकार में आप प्रकाशा , भरत सुभक्तन कह शुभ आशा |
रत्न जड़ित कंचन सिंहासन , हंस चढ़ माँ करती आसन |
आप बप्पा री सहाय करि माँ , मन आस मात पूरी माँ |
जय हो मात ब्राह्मणी री जय , नाम लिया मिलती विजय |
वरदायिनी माता तेरी जय , चित्तौड़गढ़ धनियाणी तेरी जय |
चरणा में भैरव गुणगावत , चौसंठ योगनी संग नचावत |
करों कृपा जन पर महामाया , सेवकिया रे हेले आया |
देय मात बायण जब सोटा , नासै पाप मोटा से मोटा |
हमीर सिंह रा दुःख निवारियों , सदा कृपा करि काज संवारियों |
श्री बायण जी की जय मैं लिख्यों , सकल कामना पुरण देख्यों |

🚩 चित्तौड़गढ़ री राय , सदा सेवक सहाय 🚩

🏹 @[306557149512777:]

Wednesday, 26 October 2016

Shree Ban Mataji Dohe 04

चार भुजा माँ शस्त्र धार , होती हंस सवार |
महामाया बाणेश्वरी , रखिये लाज हमार ||

धनुष-बाण ले हाथ में ,ज्योतिर्मय है रूप |
कृपा होय जो आपकी, मिले न दुःख की धूप ||

द्वार थारे खेतल बिराजै , करते दुष्ट विनाश |
चार भुजा मैया तेरी, देती सदा विश्वास ||

जननी तुम ब्रह्मांड की,अमृत कलश धर हाथ |
आठम चवदस आराधना , देत सदा माँ साथ ||

हंस सवारी होय ने , करती सदा कल्याण |
मात ब्राह्मणी रूप रो ,धरूँ सदा मैं ध्यान ||

बाणासुर संहार को , लियो आप अवतार |
चहु लोको  में हो रही , तेरी ही  जयकार ||

रूप भयंकर आपका , होती सिंह सवार |
भक्तों का दुःख हरती माँ,करती असुर संहार ||

रूप वरदायिनी आपका , माँ बायण कहलाय |
जो पूजा करे प्रेम से ,जनम सफल हो जाय ||

महामाया मातेश्वरी , दे सबको वरदान |
नाश दुखों का होय सब ,मिले अलौकिक ज्ञान ||

जय चित्तौड़राय
👍 @[306557149512777:]

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