Thursday, 13 October 2016

श्री बाण माताजी मंदिर खेमे का कुआँ

श्री बाण माताजी मंदिर खेमे का कुआँ ( जोधपुर )

श्री बाण माताजी का 250 साल पुराणा मंदिर जोधपुर में हैं चित्तौड़गढ़ धनियाणी के साथ मेहरान गढ़ धनियाणी श्री चामुंडा माता भी विराजमान हैं ।
माताजी भूतकाल में एक चबूतरे पर विराजमान थे लेकिन 2011 में माली समाज विशाल मंदिर बनाकर माताजी की मंदिर में स्थापना की ।
यह मंदिर माताजी मंदिर के नाम से जोधपुर में जाना जाता हैं ।

करो किरपा करतार थे , बायण पकड़ो बाय |
संकट में माँ सहाय करों , बायण बेगि आय ||

नवरात्रा में विशेष अनुष्ठान करने अमरसिंह पहुँचे उदयपुर , लगाया मेवाड़ की आराध्य देवी बायण माता को धोक

उदयपुर : समाजवादी पार्टी के महासचिव अमरसिंह ने मंगलवार 04-10-2016 को  जिले के सराड़ा तहसील के थाणा गावं स्थित थाणा रावला में विराजित माँ बायण की शरण में पहुँच कर शीश नवाया और पूजा अर्चना की।

उन्होंने दैवीय अनुष्ठान में भाग लिया और आहुतियां दी इससे पूर्व देश भर के 21 विशेष पंडितों के अगुवाई में ज्योतिष आचार्य मनोहर सिंह कृष्णावत ने संपूर्ण पूजा अर्चना सम्पन करवाई। अनुष्ठान के बारें में जानकारी देते हुए तनवीर सिंह कृष्णावत ने बताया कि बायण माता प्रमुख शक्तिपीठों में एक हैं । बुधवार को अमरसिंह शांति यज्ञ में भाग लेंगे।  उनके साथ ब्रिटेन की पूर्व मंत्री सैंडी वर्मा भी मौजूद रहेगी।

माँ शक्ति देती है : अमरसिंह

नवरात्रि में माँ बायण के शीश नवाने पहुंचे अमर सिंह ने कहाँ की माँ की आराधना शक्ति देती है और नव ऊर्जा का संचार करती है मेवाड़ के इस कुलदेवी में ही एसा चमत्कामर है कि वह स्वयं उन्हें बुलाती है। यहां आकर उन्हें आनन्द और शांति की अनुभूति होती है। उन्होंने देश में खुशहाली और शांति के लिए माँ से वरदान माँगा।

श्री बायण माताजी घाटड़ा

श्री बायण माताजी मंदिर घाटड़ा ( डूंगरपुर , राजस्थान )

उदयपुर जिले के घाटड़ा गाँव में स्थित श्री बायण माताजी का मंदिर , मंदिर कई साल पुराना हैं अभी नये मंदिर का निर्माण कार्य चल रहा हैं ।

माँ बायण री चाकरी , करस्या मैं दिन रात |
जग छोड़े माँ नही छोड़े , निभावे हम साथ ||

Friday, 7 October 2016

श्री बाण माताजी मंदिर मगरिवाड़ा

मगरीवाड़ा से सटी पहाड़ी पर स्थित बाण माता के चमत्कार आज भी सुनने को मिलते है। भैरूगढ़ (वणजारी) से आकर रावल ब्राह्मण परिवारों ने बसाया था मगरीवाड़ा। करीब 580 साल पूर्व स्थापित माता के मंदिर को लेकर आज भी लोगों में अटूट आस्था है। यही कारण है कि एक हजार बीघा में पहाड़ी के चहुंओर बसे ओरण से पेड़ की एक टहनी भी काटनी तथा घर ले जाना खतरे से खाली नहीं है। हर माह शुक्ल पक्ष की चौदस को मेला भरता है तथा नवरात्र में विशेष पूजन होता है। पहाड़ी स्थित मंदिर का रास्ता दुर्गम होने तथा बुजुर्गों के लिए परेशानी होने से गांव के मध्य ही एक बाण माता का मंदिर बना दिया गया।  किवदंती के अनुसार इसी स्थान पर राक्षस बाणासुर का वध जोगमाया ने तीक्ष्ण बाणों से करने से बाणमाता हो गया। व्याख्याता व रावल ब्राह्मण समाज के छगनलाल रावल ने बताया कि गांव को रावल ब्राह्मणों ने भैरूगढ (वणजारी) के पास स्थित गेढवणा खेड़ा से आकर बसाया था। जिसे उन्हें गोमण की उपाधी मिली थी। गोठवणा खेड़ा में रावल जाति के गोपालक रहते थे। जहां हर रोज एक शेर आकर गायों को मार कर चला जाता, जिससे वे परेशान थे। एक बार एक परिवार के बुजुर्ग को माता का सपना आया। जावल के पास स्थित पहाड़ी की जगह चिह्नित कर बताया कि पहाड़ी में एक पाट मिलेगा वहां जाकर एक लकड़ी का पाट रखकर उजयाली चौदस व नवरात्र में नौ दिन दीपक करना। सपने के अनुसार पहाड़ी (वर्तमान मगरीवाड़ा स्थित बाणमाता) पर दीपक करते ही शेर का आना बंद हो गया। रावल ब्राह्मण जाति के लोग आते-जाते रहे। इस दौरान गुजरात के ठाकरड़ा जाति के लोग चोरी करने आते थे। जिससे वे भी परेशान थे। रावलों ने पहाड़ी की तलहटी पर ही तोरण बांध कर गांव बसा लिया। वहां भी चोरों का भय होने से हरणी अमरापुरा से छोटी पांति के राजपूत परिवार को लाया गया था। पुराने मगरीवाला से अपभं्रश होकर बने मगरीवाड़ा में आज भी पुरानी वाव, मकानों के खंडहर व बागी खुशालसिंह की गुफाएं है। वाव के पानी में प्रचंड तेज होने से मां के प्रताप से पानी पिने वाला शूरवीर होता था। विक्रम संवत 2042 में शिवगिरी महाराज ने पहाड़ी पर मंदिर बना कर जीर्णाद्धार करवाया था।

ओरण से नहीं काटते लकड़ी 

पहाड़ी के चहुंओर लगभग एक हजार बीघा का ओरण है। मां का चमत्कार व भय होने से आज भी पेड़ की छोटी टहनी काटने से कतराते है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में मौत होने पर केवल दाह संस्कार के लिए ओरण से लकड़ी लाई जाती है। अगर कोई भूल से भी सुखी या डाली लेकर घर आता है तो उसे चमत्कार मिल जाता है। मंदिर परिसर में आज भी परम्परागत गरबे होते है। जहां ग्रामीण ही गरबा गाते है।

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Wednesday, 5 October 2016

एक बार बाण माँ तू घर आजा

एक बार बाण माँ तू घर आजा
अपने दर्शन मुझे तू दे जा....

अश्क़ों से ये नैन भरे है
राहों में काँटे बिखरे है
राग,द्वेष मन में बढ़ा है
अभिमान अब सर चढ़ा है
बोलो कैसे तेरे पास मैं आऊँ
दुःख की ये बेड़ियाँ मिटाऊँ
एक बार बाण माँ तू घर आजा
अपने दर्शन मुझे तू दे जा....

ख़ुदगर्ज़ी में डूबी है नय्या
नफ़रत का ना कोई खिवय्या
पाप के दलदल में डूबे है
आत्मा भी अब पलपल चुभे है
जात,धर्म में उलझ रहे है
धोका,लालच से ना सुलझ रहे है
एक बार बाण माँ तू घर आजा
अपने दर्शन मुझे तू दे जा.....

तू सब में इतनी शक्ति भर दे
सब के दिल का डर तू हर दे
सब सहने का हमें ज्ञान दे
है हमारे साथ तू बस ये भान दे
रातदिन मैं तुझे मनाऊँ
बस तेरे दर्शन अब मैं पाऊँ
एक बार बाण माँ तू घर आजा
अपने दर्शन मुझे तू दे जा.....

जय श्री बाण माताजी
जय श्री सोनाणा खेतलाजी

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Sunday, 2 October 2016

श्री बाण माताजी दोहा

माँ बायण करती महर, बायण कदै न कोप|
महासमरथ बड़ मातपण, अदभुद बायण ओप||
माँ बायण म्हारी धनी, हूँ बायण रो दास|
धरनी पै बायण सिवा, करू न किणरी आस||
चार धाम बायण चरण, सह तीरथ सिर मोड़|
पद बायण चख परसता, पातक कटे कऱोड||

श्री बायण माताजी ठी. भुनास

श्री बाण माताजी मंदिर ठी. भुनास ( भीलवाड़ा )

महाराणा राज सिंह जी के तीसरे पुत्र कुंवर बहादुर सिंह को भुनास गाँव की जागीर मिली थी । बहादुर सिंह जी ने यहां श्री बायण माताजी का मंदिर बनाकर मातेश्वरी की स्थापना कर पूजा अर्चना कर गढ़ की रखवाली की कामना की ।
तीन सौ साल पूर्व बहादुर सिंह जी द्वारा निर्मित श्री बायण माताजी के मंदिर की शोभा ही निराली हैं भुनास में श्री बायण माताजी के सिंह की असवारी हैं ।

राज सिंह रे कुंवर जनमियों , बहादुर सिंह ज्यारों नाम ।
भुनास गाँव जागीर मिळी , श्री बायण बणायो धाम ।।
माँ बायण रो बणाय देवरों , पूजा नित-नेम सु कीनी ।
मौज करों माँ ने भजौ , आशीष मात बायण दिनी ।।

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