Monday, 19 September 2016

नवरात्रि में कैसे करें श्री बाण माताजी को स्थापना

शक्ति के लिए श्री बाण माताजी आराधना की सुगमता का कारण मां की करुणा, दया, स्नेह का भाव किसी भी भक्त पर सहज ही हो जाता है। ये कभी भी अपने बच्चे (भक्त) को किसी भी तरह से अक्षम या दुखी नहीं देख सकती है। उनका आशीर्वाद भी इस तरह मिलता है, जिससे साधक को किसी अन्य की सहायता की आवश्यकता नहीं पड़ती है। वह स्वयं सर्वशक्तिमान हो जाता है। सिसोदिया गहलोत वंश की कुलस्वामिनी श्री बाण माताजी की इस शारदीय नवरात्रि में पूजा कर मनवांछित फल प्राप्त कर परिवार की खुशहाली के लिए श्री बाण माताजी से कामना करें ।
नवरात्र में श्री बाण माताजी की पूजा व् नवरात्र व्रत  की शुरूआत प्रतिपदा तिथि को कलश स्थापना से की जाती है। नवरात्र के नौ दिन प्रात:, मध्याह्न और संध्या के समय माँ भगवती की पूजा करनी चाहिए। श्रद्धानुसार अष्टमी या नवमी के दिन हवन और कुमारी पूजा कर बाण मैया को प्रसन्न करना चाहिए।
इस बार शारदीय नवरात्र 01 अक्टूबर 2016 से शुरु होंगे। नवरात्र के प्रथम दिन कलश स्थापना कर व्रत का संकल्प लेना चाहिए। 01 अक्टूबर को सुबह 06:17 मिनट से लेकर 07:29 तक का समय कलश स्थापना के लिए शुभ है। नवरात्र व्रत की शुरुआत प्रतिपदा तिथि को कलश स्थापना से की जाती है।
नवरात्र में  कन्या पूजन अवश्य करना चाहिए। नारदपुराण के अनुसार कन्या पूजन के बिना नवरात्र की पूजा अधूरी मानी जाती है। साथ ही नवरात्र में मां दुर्गा की पूजा के लिए लाल रंग के फूलों व रंग का अत्यधिक प्रयोग करना चाहिए। नवरात्र में "श्री दुर्गा सप्तशती" का पाठ करने का प्रयास करना चाहिए।

श्रीमद्देवी भागवत के अनुसार नवरात्र पूजा  से जुड़ी कुछ विशेष बातें निम्न हैं:
* यदि श्रद्धालु नवरात्र में प्रतिदिन पूजा ना कर सके तो अष्टमी के दिन विशेष पूजा कर वह सभी फल प्राप्त कर सकता है।
* अगर श्रद्धालु पूरे नवरात्र में उपवास ना कर सके तो तीन दिन उपवास करने पर भी वह सभी फल प्राप्त कर लेता है। कई लोग नवरात्र के प्रथम दिन और अष्टमी एवम नवमी का व्रत करते हैं। शास्त्रों के अनुसार यह भी मान्य है।
* नवरात्र व्रत देवी पूजन, हवन, कुमारी पूजन और ब्राह्मण भोजन से ही पूरा होता है।

सिसोदिया गहलोत वंश के भक्तों के लिए आदिशक्ति बाण माताजी  की आराधना का पर्व शारदीय नवरात्र हिन्दू पंचांग के अनुसार आश्विन मास के शुक्ल पक्ष में मनाया जाता है। आश्विन शुक्लपक्ष प्रथमा को कलश की स्थापना के साथ ही भक्तों की आस्था का प्रमुख त्यौहार शारदीय नवरात्र आरम्भ हो जाता है। नवरात्र में इनकी पूजा के विशेष फल बताए गए हैं।

कैसे करें श्री बाण माताजी और श्री सोनाणा खेतलाजी की इस नवरात्रि में पूजा :-

नवरात्र की पूजा नौ दिनों तक चलती हैं।  नवरात्र के आरंभ में प्रतिपदा तिथि को कलश या घट की स्थापना की जाती है। कलश को भगवान गणेश का रूप माना जाता है। हिन्दू धर्म में हर पूजा से पहले गणेश जी की पूजा का विधान है इसलिए नवरात्र की शुभ पूजा से पहले कलश के रूप में गणेश को स्थापित किया जाता है।

कलश स्थापना के लिए महत्त्वपूर्ण वस्तुएं
· मिट्टी का पात्र और जौ
· शुद्ध साफ की हुई मिट्टी
· शुद्ध जल से भरा हुआ सोना, चांदी, तांबा, पीतल या मिट्टी का कलश
· मोली (लाल सूत्र)
· साबुत सुपारी
· कलश में रखने के लिए सिक्के
· अशोक या आम के 5 पत्ते
· कलश को ढकने के लिए मिट्टी का ढक्कन
· साबुत चावल
· एक पानी वाला नारियल
· लाल कपड़ा या चुनरी
· फूल से बनी हुई माला

नवरात्र कलश स्थापना की विधि :
भविष्य पुराण के अनुसार कलश स्थापना के लिए सबसे पहले पूजा स्थल को शुद्ध कर लेना चाहिए। एक लकड़ी का फट्टा रखकर उसपर लाल रंग का कपड़ा बिछाना चाहिए। इस कपड़े पर थोड़ा- थोड़ा चावल रखना चाहिए। चावल रखते हुए सबसे पहले गणेश जी का स्मरण करना चाहिए। एक मिट्टी के पात्र (छोटा समतल गमला) में जौ बोना चाहिए। इस पात्र पर जल से भरा हुआ कलश स्थापित करना चाहिए। कलश पर रोली से स्वस्तिक या ऊं बनाना चाहिए।
कलश के मुख पर रक्षा सूत्र बांधना चाहिए। कलश में सुपारी, सिक्का डालकर आम या अशोक के पत्ते रखने चाहिए। कलश के मुख को ढक्कन से ढंक देना चाहिए। ढक्कन पर चावल भर देना चाहिए। एक नारियल ले उस पर चुनरी लपेटकर रक्षा सूत्र से बांध देना चाहिए। इस नारियल को कलश के ढक्कन पर रखते हुए सभी देवताओं का आवाहन करना चाहिए। लकड़ी के फट्टा पर श्री बाण माताजी और श्री सोनाणा खेतलाजी की तस्वीर को विराजमान करें और अंत में दीप जलाकर कलश की पूजा करनी चाहिए , दीपक बाण माताजी को घी का और खेतलाजी को तीली के तेल का दीपक करें । कलश पर फूल और मिठाइयां चढ़ाना चाहिए।

नवरात्र कलश स्थापना मुहूर्त :

नवरात्र के प्रथम दिन यानि 08 अप्रैल 2016 को कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 11:57 मिनट से लेकर 12:48 मिनट तक का है।
नोटः नवरात्र में देवी पूजा के लिए जो कलश स्थापित किया जाता है वह सोना, चांदी, तांबा, पीतल या मिट्टी का ही होना चाहिए। लोहे या स्टील के कलश का प्रयोग पूजा में इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

श्री बाण माताजी भक्त मण्डल जोधपुर द्वारा आप सभी बाण मैया के लाड़ले भक्तों को नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनायें , माँ जगदंबा सबके जीवन मे सुख, समृद्धि और शांति का वरदान दे।

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Saturday, 17 September 2016

श्री बाण माताजी को न चढ़ाए बलि

श्री बाण माताजी को नही चढ़ाई जाती बलि

महा-मायादेवी माँ दुर्गा की असंख्य योगिनियाँ हैं और सबकी भिन्न भिन्न निशानिय और स्वरुप होते हैं। जिनमे बायणमाता पूर्ण सात्विक और पवित्र देवी हैं जो तामसिक और कामसिक सभी तत्वों से दूर हैं। माँ पार्वती जी का ही अवतार होने के बावजूद बायण माता अविवाहित देवी हैं। तथापरा-शक्ति देवी माँ दुर्गा का अंश एक योगिनी अवतारी देवी होने के बावजूत भी बायण माता तामसिक तत्वों से भी दूर हैं अर्थात इनके काली-चामुंडा माता की तरह बलिदान भी नहीं चढ़ता है गलती से भी यह भूल न करें , क्योंकि बायण माता ब्रह्चारिणी अर्थात ब्रह्माणी का स्वरूप हैं । जो लोग घर पर श्री बाण माताजी की पूजा अर्चना करते हैं वे अपने घर में मांस-मदिरा का सेवन भी न करें । इसका उदाहरण आप मारवाड़ में देख सकते हैं यहां के कुछ सिसोदिया गहलोत राजपूत अपनी कुलदेवी श्री बाण माताजी को न मानकर श्री चामुंडा माताजी को मानते हैं , उनसे पूछने पर बताया कि पूर्व में श्री बाण माताजी की आराधना करना शुरू किया लेकिन हमने मांस-मदिरा का सेवन जारी रखा , जिससे माँ हमसे रुष्ट हो गयी और हमारे परिवार में तकलीफे आने लगी जिससे हमने इनकी जगह चामुंडा माता को अपनी कुलदेवी मान कर आराधना की ।
आज वे लोग जागृत होने के बावजूद भी मांस-मदिरा के लिए अपनी जननी का त्याग कर रहें हैं , मावड़ी से निवेदन हैं कि सद्बुद्धि प्रदान करें और अपनी शरण में बुलाए ।

' मांस-मदिरा त्यागों भाई , करों बायण री भक्तिं |
गलती बगसावे मावड़ी , इण सु बड़ी नही शक्ति ||

कुछ लोगो का यह भी कहना हैं कि मेवाड़ एवम् राजपूतों के बड़े बड़े रावलों में बलि चढ़ती हैं तो उनकी जानकारी के लिए बता दे कि बलि श्री बायण माताजी को न चढ़ भेरूजी को बलि चढ़ाई जाती हैं ।

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कुलदेवी-कुलदेवता की स्थापना अति आवश्यक हैं

*सिसोदिया गहलोत वंश कुलस्वामिनि श्री बाण माताजी*
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कुलदेवी और कुलदेवता का हमारे जीवन में बहुत महत्व होता हैं , इनकी पूजा आदिकाल से चलती आ रही हैं , इनके शुभ आशीर्वाद से कोई भी शुभ कार्य का शुभारम्भ नही होता हैं । कुलदेवी और कुलदेवता कुल रक्षा हेतु हमेशा सुरक्षा घेरा बनाए रखते हैं , आपके द्वारा किए गए पूजा-पाठ , व्रत कथा या जो भी आप धार्मिक कार्य करते हो उन्हें आपके इष्ट तक पहुँचाते हैं। कुलदेवी की कृपा से ही वंश में प्रगति होती हैं , लेकिन आज के आधुनिक युग में लोगो को यह नही पता कि हमारे कुलदेवी या कुलदेवता कौन हैं? जिसका परिणाम आज हम भुगत रहे हैं , पता ही नही चल रहा कि इतनी मुसीबतें कहाँ से आ रही हैं , बहुत से लोगो ऐसे भी हैं जो पूजा-पाठ , ध्यान , हवन करने के बाद भी परेशानियों से घिरे रहते हैं , परिवार में सुख-शान्ति नही होती , बहुत अच्छी पढ़ाई करने के बाद भी बेटे की नोकरी नही लगती , पिता-पुत्र में झगड़ा , बेटी की शादी नही होती और शादी हो तो संतान नही होती , ये सब संकेत हैं कि आपके कुलदेवी कुलदेवता आपसे रुष्ट हैं । आपके ऊपर जो कुलदेवी का सुरक्षा चक्र हैं वह हट चुका हैं , जिसके कारण नकारात्मक शक्तिया आप पर हावी होती हैं , फिर चाहे कितने भी पूजा पाठ , हवन करवालों कोई हल नही निकलता कोई लाभ नही होता ,  लेकिन आधुनिक लोग इन बातों को नही मानेंगे ।
आँखे बन्द करने से रात नही हो जाती , सत्य सत्य ही रहेगा इसीलिए आपसे निवेदन हैं कि आपकी कुलदेवी की शरण में जाए , वही आपके कष्टों का निवारण करेगी , आपकी गलती को माफ़ करेगी , आपके दुखों का हरण करेगी ।
25 वर्ष पूर्व सिसोदिया गहलोत वंश अपनी कुलदेवी के प्रति उजागर नही था , इन विगत वर्षों में अपनी कुलदेवी के प्रति अथाह श्रद्धा अपने मन में प्रकट हुयी हैं , वे जागृत हुए और कुलदेवी के शरण में गए माँ ने उनको क्षमा कर उद्धार किया ऐसी वरदायिनी , चित्तौड़ गढ़ राय , करुणामयी , ममतामयी , तारणहार ,  भक्त उद्धारक , पुत्र दायिनी , वैभव दायिनी , धन दायिनी महामाय राज राजेश्वरी श्री बाण माताजी की सदा ही जय ।
माँ की महिमा ही निराली हैं जिस जिस ने कुलदेवी श्री बाण माताजी और कुलदेवता श्री बाण माताजी के लाड़ले प्यारे पुत्र श्री सोनाणा खेतलाजी की घर में स्थापना कर पूजा अर्चना शुरू की हैं उनसे दुःख-दर्द व् हर तरह की नकारात्मक शक्ति कोसो दूर रहने लगी हैं । उनके घर में हजारों खुशिया आई हैं , माँ साथ में लक्ष्मी व् कुबेर का खजाना लाइ हैं ।
आज देश के प्रधानमन्त्री भी श्री बाण माताजी के कुल के ही हैं ।
सिसोदिया गहलोत वंश की कुलदेवी श्री बाण माताजी ने हमेशा से ही अपने कुल की रक्षा करती आई हैं और अपने वंश का पालन-पोषण करती आ रही हैं।
अतः जो भक्त इस पथ से भटके हुए हैं उनसे निवेदन हैं कि अपने घर में कुलदेवी श्री बाण माताजी और कुलदेवता श्री सोनाणा खेतलाजी की स्थापना कर मनवांछित फल प्राप्त करें ।

करो आराधना कुलमात री , भरसी अन्न धन रा भण्डार ।
करो घर मन्दिर में स्थापना  , संग ले सोनाणा सरकार ।।
भूप दिप करो आरती , गावो मंगला सार ।
ढोल थाळी ती माँ-बेटा ने बदावो , होसी दूर अंधार
खेतल अगवाणी माँ बाण रे , होय श्वान असवारी ।
बायण बेठा मुळक रह्या , मूरत लागे प्यारी ।।

श्री बाण माताजी जिन गोत्रों की कुलदेवी हैं , उनकी सूचि
सुर , संत , शूरवीरों की धरती राजस्थान में देवियों की पूजा का विशेष महत्व हैं । कुल की रक्षा एवम् पालन पोषण करने वाली देवी कुलदेवी कहलाती हैं , हर गोत्र की एक अलग कुलदेवी और कुलदेवता होते हैं , इसी तरह जिन कुलों की कुलदेवी श्री बाण , बायण , ब्राह्मणी माताजी हैं , वे गोत्र हम आपको निचे बता रहे हैं ।

सिसोदिया गहलोत राजपूत जिन खांप की कुलदेवी श्री बाण माताजी वे निचे दिए गए हैं , वैसे तो सिसोदिया या गहलोत कहने पर पता चल जाता है कि उनकी कुलदेवी बाण माताजी है लेकिन कोई समझने में कठिनाई ना हो इसीलिए मैं आपको सिसोदिया वंश की 24 शाखा और गहलोत वंश की 25 शाखा से अवगत कराता हूँ जिनकी कुलदेवी श्री बाण माताजी हैं ।

सीसोदियोँ की 24 खांप है
1 चन्द्रावत
2 लूणावत
3 भाखरोत
4 भंवरोत
5 भूचरोत
6 सलखावत
7 सखरावत
8 चूंडावत
9 मौजावत
10 सारंगदेवोत
11 डूलावत
12 भीमावत
13 भांडावत
14 रुदावत
15 खीँवावत
16 कीतावत
17 सूवावत
18 कुंभावत
19 राणावत
20 शक्तावत
21 कानावत
22 सगरावत मालवा
23 अगरावत
24 पूरावत

24 शाखा गहलोत शिशोद वंश
रावल बापा जी के 25 कुंवर हुए तथा 25 शाखा गहलोत
शिशोद वंश कहलाये !
1. आहाड़ा
2. कुचेरा ( कुछ कुचेरा गहलोत राजपूत स्वयं की कुलदेवी श्री अम्बा भावज मोरप्पा माताजी को बताते है , लेकिन लेकिन उनकी भी कुलदेवी श्री बाण माताजी ही हैं ।
3.  हुल
4. केलवा
5.पिपाडा
6. भीमल
7.  भटेवरा
8.  अजबरिया
9. मंगरोप
10.  आसावत
11.  बिलिया
12. कडेचा
13. मांगलिया
14. ओजाकरा
15. तिकमायत / तबडकिया
16. बेस
17. धुरनिया
18. मुन्दावत
19. डालिया
20.  गोदा
21.  दसाइत
22. तलादरा
23. भूसालिया
24.  जरफा
25. टवाणा

अन्य गोत्र जिनकी कुलदेवी श्री बाण माताजी है

अणदा - ब्राह्मणी माताजी - सोनाणा , सारंगवास
आगलुड़ - बाण माताजी - सोनाणा खेतलाजी
अकलेचा - बाण माताजी - सोनाणा खेतलाजी
आडवानी - ब्राह्मणी माताजी
आँजणा - ब्राह्मणी माताजी
उदेश - ब्राह्मणी माताजी
उंटवाड़ - ब्राह्मणी माताजी
ओड़ाणी - ब्राह्मणी माताजी
कलसोणिया - ब्राह्मणी माताजी
करोलीवाल - ब्राह्मणी माताजी
करड़ - ब्राह्मणी माताजी
काबरा - बाण माताजी
कांदलि - ब्राह्मणी माताजी
काला - ब्राह्मणी माताजी
कुण्डल बार - ब्राह्मणी माताजी
केलवा - बाण माताजी
खाटणा - ब्राह्मणी माताजी
गर्ग - ब्राह्मणी माताजी
गदेचा - बाण माताजी
गगराणि - बाण माताजी
गठाणी - बाण माताजी
गहाणि - बाण माताजी
गगलोत भाटी - बाण माताजी
गिलड़ा - बाण माताजी
गोराणा - बाण माताजी
गोदारा - बाण माताजी
गोघात - बाण माताजी
गोसलिया - ब्राह्मणी माताजी ( डीडवाना बामणी )
गोलिया - ब्राह्मणी माताजी
गौतम - बाण माताजी
घोड़ेला - ब्राह्मणी माताजी
चांदेरा - ब्राह्मणी माताजी
चिंचट - ब्राह्मणी माताजी
चित्तौड़ा - बाण माताजी
चेलाणा - ब्राह्मणी माताजी
चोहणिया - ब्राह्मणी माताजी
जाड़ोति - ब्राह्मणी माताजी
जांगला सेवग - ब्राह्मणी माताजी
जागरवाल - ब्राह्मणी माताजी
जोण - ब्राह्मणी माताजी
झुटाणा - बामणी माताजी
टांक - ब्राह्मणी माताजी
डांगी - ब्राह्मणी माताजी
डाबी - ब्राह्मणी माताजी
तरपासा - ब्राह्मणी माताजी
दगड़ावत - ब्राह्मणी माताजी
दधिवाड़िया - ब्राह्मणी माताजी
धनदे - ब्राह्मणी माताजी
नागी - ब्राह्मणी माताजी
नागरिया - ब्राह्मणी माताजी
निवेल - ब्राह्मणी माताजी
परवतीया - ब्राह्मणी माताजी
पलासिया - ब्राह्मणी माताजी
पन्नू - ब्राह्मणी माताजी
पराडिया - ब्राह्मणी माताजी
पालड़ीवाल - ब्राह्मणी माताजी
पाचल - ब्राह्मणी माताजी
पालाच - ब्राह्मणी माताजी
पाटासर - ब्राह्मणी माताजी
पाराशर - ब्राह्मणी माताजी
पेगड़ - ब्राह्मणी माताजी
पोण - ब्राह्मणी माताजी
पोठल्या - बाण माताजी
फोदर - ब्राह्मणी माताजी
बरबड़ - ब्राह्मणी माताजी
बजोच - ब्राह्मणी माताजी
बागाणा - ब्राह्मणी माताजी
बाणिया - ब्राह्मणी माताजी
बामणिया - ब्राह्मणी माताजी
बांकलिया - ब्राह्मणी माताजी
बांभरेचा - ब्राह्मणी माताजी
बारड़ - ब्राह्मणी माताजी
बाबरिया - ब्राह्मणी माताजी
बारड़ा - ब्राह्मणी माताजी
बीजल - ब्राह्मणी माताजी
बोड़ा - ब्राह्मणी माताजी
बोसेता - ब्राह्मणी माताजी
भवरा - बाण माताजी
भायलोत - बाण माताजी
भांड - ब्राह्मणी माताजी
भारद्वाज - ब्राह्मणी माताजी
भिलात - बाण माताजी
भूक - ब्राह्मणी माताजी
भुमलिया - ब्राह्मणी माताजी
भोंडक - बाण माताजी
मंडोवरा - ब्राह्मणी माताजी
मालवी - बाण माताजी
मारोटिया - ब्राह्मणी माताजी
मगड़दिया - बाण माताजी
मारवणिया - ब्राह्मणी माताजी
मांगलिक - बाण माताजी
मिंडा - ब्राह्मणी माताजी
मेरणिया - ब्राह्मणी माताजी
मोचाला - ब्राह्मणी माताजी
राकदी - ब्राह्मणी माताजी
राणे - बाण माताजी
रालड़िया - ब्राह्मणी माताजी
रोहोटिया - ब्राह्मणी माताजी
लवत - ब्राह्मणी माताजी
लायचा - ब्राह्मणी माताजी
लाताड़ - ब्राह्मणी माताजी
लिबड़िया - ब्राह्मणी माताजी
लोलग - ब्राह्मणी माताजी
वड़किया - ब्राह्मणी माताजी
वशिष्ठ - ब्राह्मणी माताजी
विनपाल - ब्राह्मणी माताजी
सखा - ब्राह्मणी माताजी
सवार - बाण माताजी
सकुत - बाण माताजी
सरादरो - ब्राह्मणी माताजी
सेऊआ - ब्राह्मणी माताजी
आडवाणी - ब्राह्मणी माता
ओडाणी - ब्राह्मणी माता
करड़ - ब्राह्मणी माता
करोलीवाल - ब्राह्मणी माता
कलसोणिया - ब्राह्मणी माता
कांदलि - ब्राह्मणी माता
गुर्जरगोता - ब्राह्मणी माता
गेवाल - ब्राह्मणी माता
नागरिक - ब्राह्मणी माता
बैंगाणी - ब्राह्मणी माता
लूणिया - ब्राह्मणी माता
एणिया - बाण माता
कपोल - बाण माता
काकोल - बाण माता
काजोत - बाण माता
केलवा - बाण माता
खेतसि - बाण माता
निसर - बाण माता
गुगलिया - बाण माता
गेलतर - बाण माता
गोराणा - बाण माता
निसक - बाण माता
आसावत - बाण माता

विशेष सुचना - मित्रों वैसे तो बाण माताजी , ब्राह्मणी माताजी एक ही हैं बस भक्त मातेश्वरी को प्रेम से कभी बाण , बायण तो कभी बामणी , ब्राह्मणी तो कभी बाणेश्वरी माताजी कहते हैं ।
ऊपर दी गयी पोस्ट में आपको हर गौत्र में माँ के दो अलग अलग नामों का प्रयोग किया गया हैं ' बाण माताजी और ब्राह्मणी माताजी '
दिए गए गोत्रों में जिन गोत्रों के पीछे ' बाण माताजी ' लिखा है उनकी कुलदेवी निसंदेह: बाण माताजी चित्तौड़ गढ़ में विराजमान है और कुलदेवता श्री सोनाणा खेतलाजी हैं ।
उन गोत्रों की कुलदेवी का पाट स्थान चित्तौड़ गढ़ और कुलदेवता श्री सोनाणा खेतलाजी ही होंगे ।

जिन गोत्रों के पीछे ब्राह्मणी माताजी लिखा हुआ हैं , उनकी कुलदेवी का पाट स्थान वही होगा जो आपके पूर्वज जिस स्थान पर जाकर उपासना या पूजा किया करते थे या जहाँ से आप पहली बार ज्योत लाए हो ।
उदाहरण के तौर पर सिंगानिया गोत्र की कुलदेवी ब्राह्मणी , बाण माताजी ही हैं और यह गोत्र माताजी के पल्लू धाम से एक बार ज्योत लायी है या इनके पूर्वज इनको आराध्य या कुलदेवी मान कर पल्लू में विराजमान रूप की पूजा करते थे तो आपकी कुलदेवी का पाट स्थान पल्लू ही होगा ।
और अगर दी गयी गोत्रों में अगर उन्हें आज तक पता न लगा हो कि उनकी कुलदेवी बाण माताजी , ब्राह्मणी माताजी  हैं ।
अगर इस पोस्ट के माध्यम से पहली बार आपको पता चले कि आपकी कुलदेवी ब्राह्मणी माताजी या बाण माताजी है तो आप मातेश्वरी की ज्योत चित्तौड़ से ला सकते हैं श्री बाण माताजी आपकी अपने कुल का ही मानेगी ।

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Wednesday, 14 September 2016

मैहर करों माता ब्रह्माणी

चिंता हरण , मंगल करण , विघन विडारण विख्यात ।
माँ ब्राह्मणी कष्ट निवारिणी , जय हो बायण मात ।।

ॐ नमो श्री जगदम्बा रूपम , शक्ति तू ज्योतिसरूपम ।
चित्तौड़ गढ़ वाली ऐ धनियाणी , मैहर करों माता ब्रह्माणी ।।
द्वापरयुग में माँ अवतार लियों , बाणासुर ने आप मारियों ।
दैत्यों ने हणती दयाळी , मैहर करों माता ब्रह्माणी ।।
आगे भेरू घुँघरिया घमकावे , हेलों सुण बायण दोड्या आवे ।
तीनों लोको में माँ बाजै ताळी , मैहर करो माता ब्रह्माणी ।।
अन्न धन रा भण्डार भराणी , वेदों में माँ तूँ वखाणी ।
देवी तूँ तो खूब दयाळी , मैहर करो माता ब्रह्माणी ।।
रुपाळ में माँ तूँ वरदायिनी , सहाय करें माता सुखदायिनी ।
हंस चढ़ आवो माँ भवानी ,  मैहर करों माता ब्रह्माणि ।।
पल पल में माँ वास थारों , नहीं कोई माँ तुज ती न्यारो ।
चवद ब्रह्माण्ड में शक्तिशाली , मैहर करों माता ब्रह्माणी ।।
विद्या रुपे विश्व विधाता , बाण आप ही बायण माता ।
भक्तों देवी नजरे भाळी , मैहर करो माता ब्रह्माणी ।।
मायड़ जग में नही कोई मारों , अब मावड़ी आप साम्भळो ।
पार करों माँ चार भुजाळी , मैहर करों माता ब्रह्माणी ।।
तूँ मायड़ म्हारी आराधा , यह कहे माता अनुराधा ।
महेंद्र सिंह गुणगावे माड़ी , मैहर करो माता ब्रह्माणी ।।

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Thursday, 8 September 2016

श्री बाण माताजी मन्दिर देचू

श्री बाण माताजी मन्दिर देचू

मित्रों श्री बाण माताजी भक्त मण्डल जोधपुर ( राज.) द्वारा हमेशा आपको श्री बाण माताजी के बारें में नई नई जानकारियां दी हैं , आज हम आज से लगभग 250-300 साल पूर्व देचू गाँव में निर्मित श्री बाण माताजी के मन्दिर के दर्शन कराते हैं ।
300 साल पूर्व देचू गाँव आसवतों की जागीर हुआ करता था , आसावत श्री बाण माताजी के अनन्य भक्त थे , दिन-रात माताजी की पूजा अर्चना आराधना किया करते थे ।
आसवतों की इस जागीर को चाहड़देव जी राठौड़ ने धोखे से छिन ली और यहाँ के ठाकुर बन गए ।
अपने कुल के भक्तों के साथ धोखा होने और पूजा पाट छोड़ने पर श्री बाण माताजी रुष्ठ हो गए और रात को चाहड़देव जी ने स्वप्न में देवी के दर्शन किये और मूर्ती खंडित होते हुए देखा , भयभीत चाहड़देव जी ने सुबह फिर से आसावतों को वो जागीर देने का आश्वासन देने और मन्दिर पूजा का भार सौपने भेजा , लेकिन आसावत राजपूतों ने यह कह कर मना कर दिया कि आप हमारे बेटी जंवाई हो हम यह जागीर वापस नही ले सकते लेकिन श्री बाण माताजी मन्दिर की पूजा की जिम्मेदारी हम लेते हैं और कुछ परिवार वही रुक गए और कुछ जोधपुर , जैसलमेर जाकर बस गए ।
जो देचू में ही रुके वे निरंतर पूजा करते रहे और आज वहाँ श्री बाण माताजी के मन्दिर के आगे विशाल भूमि पड़ी हैं ।
मन्दिर प्रांगण में विराजमान मूर्ती आज भी खंडित हैं जो चाहड़देव जी राठौड़ को स्वप्न में दिखी थी , मन्दिर एक छोटे से चबूतरे पर बना हुआ हैं जिसके चारों और बिजलीघर वालों ने माताजी के चमत्कार को देख यहाँ मन्दिर के चारों और परकोटा बनाया , हुआ यूँ कि मन्दिर के आगे पड़ी पूरी जमीन श्री बाण माताजी की हैं बिजलीघर बनाने वाले ठेकेदार ने काम शुरू कर दिया लेकिन काम आगे न बढ़ पाया और रात को माताजी ने उसे कुछ चेतना दी , सुबह कुछ बुजर्ग लोगो को पूछा जिससे उसे ज्ञात हुआ कि यहाँ देवी थान हैं , ठेकेदार ने दर्शन कर मन्नत  मांगी , मन्नत पूरी होने पर वह माताजी से प्रभावित हुआ और  उसने मन्दिर के चारो और परकोटा बनाया ।
मन्दिर में विराजमान श्री बाण माताजी ने भैंसे की असवारी कर बीस भुजा धारण किये हुए हैं ।
इस संदर्भ में रावो और भाटों की बही में लिखा हुआ  हैं जो श्री बाण माताजी के पूर्व अवतारों एवम् देचू स्थित मन्दिर के इतिहास को उजागर करता है:

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नख चौबीस साखरों शिशोदिया राणावत कुलदेवी सतयुग री आद आंबे...
कुलदेवी त्रेता जुग री अजेश्वरी राजा अज घर अवतार लियो , जीण सु अजेश्वरी कहलाई...
कुलदेवी कलयुग री बाणेश्वरी बप्पा रावल रे बाण ऊपर आसान राखता , जिणसूं बाणेश्वरी कहलाई...
वर देवी आसावतों री बीस भुजा देचू माते वरदान हुयी...

चबूतरे पर स्थित मन्दिर पूरी खंडहर अवस्था में पड़ा हैं , मन्दिर की देख रेख पहले भोपाजी किया करते थे अब उनकी उम्र हो जाने और शरीर स्वस्थ न रहने के कारण पूजा करने नही आ सकते लेकिन उनके घर से सुबह कोई एक आकर दीआं बाती करके जाता हैं , जब भी कोई श्री बाण माताजी के कुल के भक्त रामदेवरा जाए या देचू से होकर गुजरे तो यहाँ दर्शन जरूर करें । माँ ने तो अपना फर्ज निभाया और अपने कुल का पालन कर रही हैं , लेकिन हमारा कर्तव्य बनता हैं कि इस मन्दिर का पुनर्निर्माण कराए और माताजी सही रूप से फिर से विराजमान करें ।
मन्दिर देचू से रामदेवरा जाते समय बिच रास्ते में आता हैं देचू से 5 किलोमीटर की दुरी पर बिजलीघर बनाया हुआ हैं और एक विशाल पेड़ के निचे यह मन्दिर हैं , मन्दिर की जानकारी हेतु वहाँ बोर्ड भी लगा हुआ हैं ।

आसावत अड़थ्ड्या , कुण ले सार सँभाळ ।
विरद बढ़ाए बीस भुजाळी , चित्तौड़ गढ़ रुखाळ ।।
भैंसा पर बीस भुजाळी बैस , आवो तारण हार ।
तूँ रुठ्या जग रूठे , था शरणा माई संसार ।।
पैलां अम्बा अवतरि , दूजा जग अजेश्वरी ।
बाण पर बेह बप्पा रावल रे , मात कहलाई बाणेश्वरी ।।
आस काई उणरी करूँ , हैं जिणरे दो हाथ ।
मो लिधि शरण जिणरी , वा बीस भुजाळी मात ।।

● @[306557149512777:]
● जल्द ही मन्दिर कब बना और इसके बारें में अन्य जो भी जानकारी होगी आप तक पहुँचा दी जायेगी ।

आपके गाँव में भी मन्दिर हो तो हमे संपर्क करें और बताए और +918107023716 पर पूरी जानकारी फ़ोटो सहित भेज देवे ।
【  @[306557149512777:] 】

Friday, 2 September 2016

श्री बाण माताजी के दर्शनार्थ जाने वाले संघ

चलो बुलावा आया हैं , बाण मैया ने बुलाया हैं.....
दर्शन करने मैया के धाम चलों , बाण मैया का मेला आया हैं...

गत 15 वर्षों में चित्तौड़ गढ़ स्थित सिसोदिया गहलोत वंश की कुलस्वामिनि श्री बाण माताजी के दरबार में हजारों भक्तों का आना-जाना शुरू हो चुका हैं , इन विगत वर्षों में माताजी के कुल के भक्तों को पता लगने लगा हैं कि उनकी कुलदेवी श्री बाण माताजी ( चित्तौड़ गढ़ राय ) हैं । 15 साल पूर्व श्री बाण माताजी को कोई जनता तक नही था  , जहाँ अब राजस्थान , गुजरात , मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र से भक्त दर्शन हेतु ट्रेन , बस , कार या पैदल दर्शनार्थ आने लगे हैं , हर घर ,  हर गाँव में माताजी के मन्दिरों का निर्माण हो रहा हैं । वहाँ के स्थानीय निवासियों का कहना हैं कि आने वाले वर्षों में यह मन्दिर इतना मशहूर होगा कि यहा दर्शन करने हेतु पंक्ति में खड़ा होना पड़ेगा ।
यह तो बाण मैया का चमत्कार ही मानों ,  यहाँ स्वयं चित्तौड़ वासी जिस देवी का नाम नही जानते थे मन्दिर नही जानते थे , वही आज दूर दूर से आने वाले भक्तों को रास्ता बता बता कर थक गए हैं , मैया की लीला अपरम्पार हैं ।
मन्दिर में राजस्थान से कई जिलों से दर्शनार्थ हेतु भक्त मोटरसाइकिलों , बसों और पैदल आ रहे हैं जिसमे जोधपुर , बालोतरा , सिरोही व् पाली से अत्यधिक हैं ।
इस महीने एवम् अगले माह में श्री बाण माताजी के दरबार में आने वाले एवम् रवाना हो चुके संघो की सूचि :-

01 ) माँ बाणेश्वरी गहलोत भाईपा ग्रुप बालोतरा की अष्टम पद यात्रा श्री बाण माताजी के कुचेरा ( नागौर ) स्थित मन्दिर हेतु इस संघ की रवानगी 30 अगस्त को गांधीपुरा स्थित माली समाज भवन से गाजे-बाजे के साथ रवाना हुई ,  पावन पद यात्रा संघ में श्री बाण माता का भव्य रथ के साथ डीजे साउण्ड पर भजनों की प्रस्तुति के साथ बालोतरा के मुख्य मार्गो से गुजरता हुआ रवाना हुआ ।
02/09/2016 को संघ खेमे का कुआँ , जोधपुर में विश्राम करेगा ।
08 सितम्बर 2016 गुरूवार को सांय ' माँ बाणेश्वरी गहलोत भाईपा ग्रुप बालोतरा ' द्वारा विशाल भजन संध्या का आयोजन किया गया हैं जिसमे राजस्थान के भजन सम्राट ' प्रकाश माली एंड पार्टी ' अपने भव्य भजनों की प्रस्तुति देंगे ।
स्थान : श्री बाण माताजी मन्दिर , जोधा पालड़ी

02 ) श्री बाण माताजी नवयुवक मित्र मण्डल खिवान्दी द्वारा द्वितीय पैदल यात्रा संघ 30/08/2016 को मालियों की वाड़ी खिवान्दी से श्री बाण माताजी मन्दिर सुमेरपुर दर्शनार्थ हेतु पहुँचा , माली समाज द्वारा विशेष महाप्रसादी का भी आयोजन  किया गया था ।
आप की जानकारी के लिए बता दे कि खिवान्दी में भी श्री बाण माताजी के मन्दिर का नव निर्माण हो रहा हैं ।

03 ) श्री बाण माताजी मित्र मण्डल नितोड़ा द्वारा आयोजित श्री बाण माताजी मोटरसाइकिल यात्रा 1/11/2016 को प्रात: 7:15 बजे नितोड़ा से श्री बाण माताजी मन्दिर चित्तौड़गढ़ दर्शन हेतु प्रस्थान करेगी । इस श्री बाण माताजी मोटरसाइकिल यात्रा में भाग लेने वाले यात्रियों के लिए टी-शर्ट संघ द्वारा फ्री दिया जाएगा ।
नितोड़ा ( सिरोही ) से सीधा श्री बाण माताजी चित्तौड़गढ़ दर्शनार्थ , वहा से दर्शन कर चित्तौड़ से श्रीनाथ जी ( चारभुजा ) , श्री नामा माताजी ( देसूरी ) , श्री सोनाणा खेतलाजी सोनाणा ( जुनी धाम ) व् सारंगवास ( नवी धाम ) , श्री आशापुरा माताजी ( नाडोल ) से नितोड़ा ( सिरोही ) दो दिन व् एक रात के सिमित समय में पूरी होगी ।

जो भक्त भाग लेना चाहते हैं वे संपर्क करें :
श्री मोहन भाई :- 9998930050
श्री मगन भाई :- 9510938598

04 ) श्री बाण माताजी की 13वीं बार पैदल यात्रा संघ झाड़ौली से ( नियर पिंडवाड़ा ) से रवाना होगी ।

श्री बाणेश्वरी माताजी ,चित्तौड़गढ़ पावन पद यात्रा-२०१६

सिरोही व जालोर जिले में बाण माताजी चित्तौड़गढ़,सोनाणा खेतलाजी के लिए सबसे विशालतम्  पैदल यात्रा संघ

13वीं बार 05/11/2016से12/11/2016 तक

(झाडोली),सिरोही ,जालोर जिले के पिथापुरा,बडगाँव,पावटी,रामसीन,गुडा,मोहब्बतनगर,कालन्द्री,बरलुट,देलदर,वराडा,कैलाशनगर,जावाल,ऊड़,पाडीव,गोइली,रामपुरा,खांबल गांवो से चित्तौड़गढ दुर्ग 

आमंत्रण स्थल-: घाँची समाज भवन(वाव),झाडोली,तहसील -पिण्डवाड़ा, जिला -सिरोही

गायक -: रामेश्वर माली सेवाडी & ललिता पंवार एण्ड पार्टी

 विशेष -:चित्तौडगढ़ राजमहल के बहार चढावे बोले जायेंगे 9:30बजे 12/11/2016

 गायक -:किशोर पालीवाल एण्ड पार्टी सुमेरपुर

आयोजक  36 कौम श्री सिसोदिया गहलोत परिवार सिरोही व जालोर 


कार्यक्रम के संपर्क कर्ता -: नेनाराम घांची पाडीव(09461064210),धनराजभाई सिरोही(09460123812),रमेशभाई झाडोली(09869520611)

05 ) श्री बाण माताजी भक्त मण्डल जोधपुर द्वारा भी जल्द ही चतुर्थ दर्शन यात्रा संघ का आयोजन किया जायेगा जिसकी पूरी सुचना आपको तैयार होते ही आप तक पहुँचा दी जायेगी ।

● पैदल जाने वाले इन सभी भक्तों का हौसला बढ़ाए एवम् जो भक्त इन संघो से जुड़ना चाहता हैं वह संपर्क कर मातेश्वरी के दर्शन हेतु पधारे ।

इन सभी पैदल , मोटरसाइकिल व् बस के माध्यम से जाने वाले संघो व् भक्तों को @[306557149512777:] द्वारा मंगलयात्रा की कामना एवम् हार्दिक शुभकामनाएँ श्री बाण माताजी आपके मनोरथ पूर्ण करें व् अपनी छतर छाँव हमेशा आप रखे ।

● नोट : अगर आपके गांव से श्री बाण माताजी दर्शनार्थ हेतु संघ जाने वाला हैं तो हमे संपर्क कर बताए ताकि माताजी के भक्तों को भी लाभ मिल सके , जो जुड़ना चाहे वो जुड़ सके ।
संपर्क : - +918107023716 ( श्री बाण माताजी भक्त मण्डल जोधपुर ( राज.)
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*माँ बायण करती जगत भलो , दर्शन को गढ़ चित्तौड़ चलो*

शुभेच्छुक : @[306557149512777:]

जय श्री बाण माताजी
जय श्री सोनाणा खेतलाजी
जय बाबा री
जय एकलिंग नाथ जी

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