Wednesday, 20 April 2016

श्री बाण माताजी चित्तोड़ धणियाणि

सिसोदिया गहलोत वंश की कुलदेवी श्री बाण माताजी

मेवाड़ राजवंश की कुलदेवी श्री बाण माताजी हैं। इन्ही के आशीर्वाद और कृपा से सिसोदिया वंश को निरंतर सफलता प्राप्त होती रही हैं घोर संघर्ष और विपदाओं के बाद भी महाराणाओं ने कभी साहस नही खोया । उनका आत्म विश्वास बनाए रखने में महामाया ने सदा सहायता की है , अरबों और मुग़लो के  आक्रमण के बाद कई राज्य नष्ट हो गए लेकिन देवी के आशीष से यह वंश 7 वीं सदी के प्रारम्भ से आज तक दृढ़ हैं । मातेश्वरी ने इस वंश के जिन राणाओं को चमत्कार दिए उनमे बप्पा रावल , राणा लक्ष्मण सिंह , राणा हमीर सिंह , महाराणा प्रताप सिंह हैं ।

विध्व हरण मंगल करण , भूमि परम् अनूप ।
बायण मम हृदय बसो , भूपन की तुम भूप ।।

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Monday, 18 April 2016

श्री बाण माताजी जिन गोत्रों की कुलदेवी हैं , उनकी सूचि

सुर , संत , शूरवीरों की धरती राजस्थान में देवियों की पूजा का विशेष महत्व हैं । कुल की रक्षा एवम् पालन पोषण करने वाली देवी कुलदेवी कहलाती हैं , हर गोत्र की एक अलग कुलदेवी और कुलदेवता होते हैं , इसी तरह जिन कुलों की कुलदेवी श्री बाण , बायण , ब्राह्मणी माताजी हैं , वे गोत्र हम आपको निचे बता रहे हैं ।

सिसोदिया गहलोत राजपूत जिन खांप की कुलदेवी श्री बाण माताजी वे निचे दिए गए हैं , वैसे तो सिसोदिया या गहलोत कहने पर पता चल जाता है कि उनकी कुलदेवी बाण माताजी है लेकिन कोई समझने में कठिनाई ना हो इसीलिए मैं आपको सिसोदिया वंश की 24 शाखा और गहलोत वंश की 25 शाखा से अवगत कराता हूँ जिनकी कुलदेवी श्री बाण माताजी हैं ।

सीसोदियोँ की 24 खांप है
1 चन्द्रावत
2 लूणावत
3 भाखरोत
4 भंवरोत
5 भूचरोत
6 सलखावत
7 सखरावत
8 चूंडावत
9 मौजावत
10 सारंगदेवोत
11 डूलावत
12 भीमावत
13 भांडावत
14 रुदावत
15 खीँवावत
16 कीतावत
17 सूवावत
18 कुंभावत
19 राणावत
20 शक्तावत
21 कानावत
22 सगरावत मालवा
23 अगरावत
24 पूरावत

24 शाखा गहलोत शिशोद वंश
रावल बापा जी के 25 कुंवर हुए तथा 25 शाखा गहलोत
शिशोद वंश कहलाये !
1. आहाड़ा
2. कुचेरा ( कुछ कुचेरा गहलोत राजपूत स्वयं की कुलदेवी श्री अम्बा भावज मोरप्पा माताजी को बताते है , लेकिन लेकिन उनकी भी कुलदेवी श्री बाण माताजी ही हैं ।
3.  हुल
4. केलवा
5.पिपाडा
6. भीमल
7.  भटेवरा
8.  अजबरिया
9. मंगरोप
10.  आसावत
11.  बिलिया
12. कडेचा
13. मांगलिया
14. ओजाकरा
15. तिकमायत / तबडकिया
16. बेस
17. धुरनिया
18. मुन्दावत
19. डालिया
20.  गोदा
21.  दसाइत
22. तलादरा
23. भूसालिया
24.  जरफा
25. टवाणा

अन्य गोत्र जिनकी कुलदेवी श्री बाण माताजी है

अणदा - ब्राह्मणी माताजी - सोनाणा , सारंगवास
आगलुड़ - बाण माताजी - सोनाणा खेतलाजी
अकलेचा - बाण माताजी - सोनाणा खेतलाजी
आडवानी - ब्राह्मणी माताजी
आँजणा - ब्राह्मणी माताजी
उदेश - ब्राह्मणी माताजी
उंटवाड़ - ब्राह्मणी माताजी
ओड़ाणी - ब्राह्मणी माताजी
कलसोणिया - ब्राह्मणी माताजी
करोलीवाल - ब्राह्मणी माताजी
करड़ - ब्राह्मणी माताजी
काबरा - बाण माताजी
कांदलि - ब्राह्मणी माताजी
काला - ब्राह्मणी माताजी
कुण्डल बार - ब्राह्मणी माताजी
केलवा - बाण माताजी
खाटणा - ब्राह्मणी माताजी
गर्ग - ब्राह्मणी माताजी
गदेचा - बाण माताजी
गगराणि - बाण माताजी
गठाणी - बाण माताजी
गहाणि - बाण माताजी
गगलोत भाटी - बाण माताजी
गिलड़ा - बाण माताजी
गोराणा - बाण माताजी
गोदारा - बाण माताजी
गोघात - बाण माताजी
गोसलिया - ब्राह्मणी माताजी ( डीडवाना बामणी )
गोलिया - ब्राह्मणी माताजी
गौतम - बाण माताजी
घोड़ेला - ब्राह्मणी माताजी
चांदेरा - ब्राह्मणी माताजी
चिंचट - ब्राह्मणी माताजी
चित्तौड़ा - बाण माताजी
चेलाणा - ब्राह्मणी माताजी
चोहणिया - ब्राह्मणी माताजी
जाड़ोति - ब्राह्मणी माताजी
जांगला सेवग - ब्राह्मणी माताजी
जागरवाल - ब्राह्मणी माताजी
जोण - ब्राह्मणी माताजी
झुटाणा - बामणी माताजी
टांक - ब्राह्मणी माताजी
डांगी - ब्राह्मणी माताजी
डाबी - ब्राह्मणी माताजी
तरपासा - ब्राह्मणी माताजी
दगड़ावत - ब्राह्मणी माताजी
दधिवाड़िया - ब्राह्मणी माताजी
धनदे - ब्राह्मणी माताजी
नागी - ब्राह्मणी माताजी
नागरिया - ब्राह्मणी माताजी
निवेल - ब्राह्मणी माताजी
परवतीया - ब्राह्मणी माताजी
पलासिया - ब्राह्मणी माताजी
पन्नू - ब्राह्मणी माताजी
पराडिया - ब्राह्मणी माताजी
पालड़ीवाल - ब्राह्मणी माताजी
पाचल - ब्राह्मणी माताजी
पालाच - ब्राह्मणी माताजी
पाटासर - ब्राह्मणी माताजी
पाराशर - ब्राह्मणी माताजी
पेगड़ - ब्राह्मणी माताजी
पोण - ब्राह्मणी माताजी
पोठल्या - बाण माताजी
फोदर - ब्राह्मणी माताजी
बरबड़ - ब्राह्मणी माताजी
बजोच - ब्राह्मणी माताजी
बागाणा - ब्राह्मणी माताजी
बाणिया - ब्राह्मणी माताजी
बामणिया - ब्राह्मणी माताजी
बांकलिया - ब्राह्मणी माताजी
बांभरेचा - ब्राह्मणी माताजी
बारड़ - ब्राह्मणी माताजी
बाबरिया - ब्राह्मणी माताजी
बारड़ा - ब्राह्मणी माताजी
बीजल - ब्राह्मणी माताजी
बोड़ा - ब्राह्मणी माताजी
बोसेता - ब्राह्मणी माताजी
भवरा - बाण माताजी
भायलोत - बाण माताजी
भांड - ब्राह्मणी माताजी
भारद्वाज - ब्राह्मणी माताजी
भिलात - बाण माताजी
भूक - ब्राह्मणी माताजी
भुमलिया - ब्राह्मणी माताजी
भोंडक - बाण माताजी
मंडोवरा - ब्राह्मणी माताजी
मालवी - बाण माताजी
मारोटिया - ब्राह्मणी माताजी
मगड़दिया - बाण माताजी
मारवणिया - ब्राह्मणी माताजी
मांगलिक - बाण माताजी
मिंडा - ब्राह्मणी माताजी
मेरणिया - ब्राह्मणी माताजी
मोचाला - ब्राह्मणी माताजी
राकदी - ब्राह्मणी माताजी
राणे - बाण माताजी
रालड़िया - ब्राह्मणी माताजी
रोहोटिया - ब्राह्मणी माताजी
लवत - ब्राह्मणी माताजी
लायचा - ब्राह्मणी माताजी
लाताड़ - ब्राह्मणी माताजी
लिबड़िया - ब्राह्मणी माताजी
लोलग - ब्राह्मणी माताजी
वड़किया - ब्राह्मणी माताजी
वशिष्ठ - ब्राह्मणी माताजी
विनपाल - ब्राह्मणी माताजी
सखा - ब्राह्मणी माताजी
सवार - बाण माताजी
सकुत - बाण माताजी
सरादरो - ब्राह्मणी माताजी
सेऊआ - ब्राह्मणी माताजी

विशेष सुचना - मित्रों वैसे तो बाण माताजी , ब्राह्मणी माताजी एक ही हैं बस भक्त मातेश्वरी को प्रेम से कभी बाण , बायण तो कभी बामणी , ब्राह्मणी तो कभी बाणेश्वरी माताजी कहते हैं ।
ऊपर दी गयी पोस्ट में आपको हर गौत्र में माँ के दो अलग अलग नामों का प्रयोग किया गया हैं ' बाण माताजी और ब्राह्मणी माताजी '
दिए गए गोत्रों में जिन गोत्रों के पीछे ' बाण माताजी ' लिखा है उनकी कुलदेवी निसंदेह: बाण माताजी चित्तौड़ गढ़ में विराजमान है और कुलदेवता श्री सोनाणा खेतलाजी हैं ।
उन गोत्रों की कुलदेवी का पाट स्थान चित्तौड़ गढ़ और कुलदेवता श्री सोनाणा खेतलाजी ही होंगे ।

जिन गोत्रों के पीछे ब्राह्मणी माताजी लिखा हुआ हैं , उनकी कुलदेवी का पाट स्थान वही होगा जो आपके पूर्वज जिस स्थान पर जाकर उपासना या पूजा किया करते थे या जहाँ से आप पहली बार ज्योत लाए हो ।
उदाहरण के तौर पर सिंगानिया गोत्र की कुलदेवी ब्राह्मणी , बाण माताजी ही हैं और यह गोत्र माताजी के पल्लू धाम से एक बार ज्योत लायी है या इनके पूर्वज इनको आराध्य या कुलदेवी मान कर पल्लू में विराजमान रूप की पूजा करते थे तो आपकी कुलदेवी का पाट स्थान पल्लू ही होगा ।
और अगर दी गयी गोत्रों में अगर उन्हें आज तक पता न लगा हो कि उनकी कुलदेवी बाण माताजी , ब्राह्मणी माताजी  हैं ।
अगर इस पोस्ट के माध्यम से पहली बार आपको पता चले कि आपकी कुलदेवी ब्राह्मणी माताजी या बाण माताजी है तो आप मातेश्वरी की ज्योत चित्तौड़ से ला सकते हैं श्री बाण माताजी आपकी अपने कुल का ही मानेगी ।

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Saturday, 16 April 2016

श्री बाण माताजी मंदिर पोमावा

सिसोदिया गहलोत कुलस्वामिनि श्री बाण माताजी के पोमावा गाँव स्थित नव निर्मित मंदिर की चैत्र नवरात्रि की अष्टमी 14/04/2016 को प्राण प्रतिष्ठा की गयी । जिसमे गाँव के सभी बड़े बुजुर्गो  ने बढ़ चढ़ कर भाग लिया एवम् मातेश्वरी के जयकारे लगाए ।

जिन भक्तों ने मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा में विशेष भाग लिया उनके नाम
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मूर्ति स्थापना - श्री भवानी सिंह जी राणावत
तोरण - श्री वने सिंह जी राणावत
मोबण - श्री गोविन्द सिंह जी राणावत
मुख्य हवन - श्री अमर सिंह जी राणावत
कलश ( इंडा ) - ठाकुर साहब श्री उम्मेद सिंह जी राणावत
प्रथम आरती - ठाकुर साहब श्री खुमाण सिंह जी राणावत
ध्वजा - श्री वीरेंदर सिंह जी राणावत

मंदिर में हुयी प्राण प्रतिष्ठा के कुछ सुनहरे पल जो श्री गोपाल सिंह जी राणावत द्वारा हमे भेजी गयी कुछ तस्वीरें और मातेश्वरी दर्शन

बायण माता ब्राह्मणी , नित उठ थाने ध्यावा ।
प्राण प्रतिष्ठा ह्म हुयी , राणावत गाँव पोमावा ।।

माजी म्हारा मन मोवणा , हिवड़ै हेत अपार ।
बायण बेगा आवजो , म्हारी चित्तोड़ री सरकार ।।

और भी ऐसे ही श्री बाण माताजी के नए नए मंदिरों की जानकारी , दोहे , स्तुति एवम् मातेश्वरी के इतिहास के बारें में अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए हमारे फेसबुक पेज से जुड़े
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जय हो श्री बाण मैया की जय हो श्री सोनाणा खेतलाजी की जय हो श्री एकलिंग नाथ जी की

Tuesday, 12 April 2016

जय माँ बायण

पाटण गढ़ सूं उड़ हंसौ, मेवाड़ मांही आयौ
मरु री धरती ने देख ,  मन उणरो चकरायौ

जौहर शाका नित हुवे ,  आ धरती अणजाणी
भड़ भगता री बात न पूछौ, लहू बहे ज्यूँ पाणी

गढ़ मोटो मेवाड़ रो ,  अद्भुत किलो निजर आयों
हंसौ उड़ किला में बैठों , माँ बायण रो थान थपायों

मोटी मात भवानी म्हारी , बप्पा लक्ष्मण गुण गावै
पल में दुखड़ा दूर करे , अपार  सुख सरसावै

नर नारी दर्शन ने आवे , राखे माँ चतर छाया
इण देवी री बात न पूछों , मोटी माँ री माया

रोगी भोगी सब आवे , सुखी हो जावे काया
जरणी मात जगदम्बा म्हारी , प्यारी लागै भाया

बेटा ज्यारा खेतल देव , सारंगवास रा निवासी
श्वान सवारी ज्यारे शोभती , महिमा ज्यारि साची

लुटण राज मेवाड़ रों  , दुष्ट ख़िलजी आयौ
भुज भवानी भांजिया , ख़िलजी अति घबरायौ

अन्न धन्न भण्डार भरी , सेवक सहाय आई
सुमरिया पार उतारिया , मातेश्वरी मेवाड़ी माई

अनु उतारे आरती ,  मातेश्वरी थू मतवाळी
महेंद्र मनाया आवजों , मात चित्तोड़ गढ़ वाळी ।

Monday, 21 March 2016

श्री ब्राह्मणी माताजी मंदिर मुन्दियाड़

श्री ब्राह्मणी माताजी मंदिर मुन्दियाड़

नागौर से २५ कि॰मी॰ की दूरी पर स्थित मून्दियाड़ गांव है। इस गांव को महेश्वरियों ने बसाया था। इस गांव में प्राचीन ब्राह्मणी माता का मन्दिर है। इन्हे मून्दड़ों की माता भी कहते हैं। लाल पत्थरों से निर्मित यह मन्दिर शिल्पकला का अनुपम उदाहरण है। मन्दिर के समीप ही लाल पत्थरों से निर्मित ब्र्ह्मा जी की खण्डित प्रतिमा स्थित है। इसलिए अनुमान लगाया जाता है कि यह मन्दिर मूलतः ब्रह्माजी का रहा होगा किन्तु मध्यकाल में मुस्लिम आक्रमणकारियों द्वारा आक्रमण कर इसे खण्डित किये जाने के उपरान्त ब्रह्माजी की पूजा अर्चना बन्द हो गई तथा बाद में स्थापित ब्रह्माणी माता मून्दड़ों की माता के नाम से पूजी जाने लगी। वि॰सं॰ 1925 में ब्राह्मणी माता की चार भुजा धारी  नवीन प्रतिमा इस मन्दिर में स्थापित की गई।

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Thursday, 17 March 2016

श्री बाण माताजी सलूम्बर , उदयपुर

सलूम्बर राज महल में विराजमान श्री बाण माताजी की महिमा ही निराली हैं।
मेवाड़ की सेना में " हरावल " पंक्तीं के अधिकारी चूण्डावतों के पाटवी ठिकाणा सलूम्बर राज महल में राजपरिवार द्वारा स्थापित मन्दिर हैं , आजादी से पूर्व इस मंदिर में मातेश्वरी की पूजा स्वयं रावत जी एवम् समस्त राज परिवार द्वारा की जाती थी।
किवदंतियों के अनुसार एक बार रावत जी सलूम्बर से स:परिवार उदयपुर आ गए , वे सलूम्बर से बाण माताजी को भी अपने साथ लेकर आ गए , तब बाण माताजी वहा से स्वयं यहा सलूम्बर आकर वापस विराजमान हो गए ।
कुछ समय के लिए  मन्दिर में ज्यादा संख्या में चमगादड़ों ने अपना बसेरा बना लिया था , इसकी वजह से मंदिर में किसी का आना जाना नही रहता था ।
अभी माँ की कृपा से मन्दिर में एक भी चमगादड़ नही है , मातेश्वरी के पुजारी जी एवम् ग्रामवासि बताते है कि मातेश्वरी दिन में तीन रूप करती है , और इस अद्भुत चमत्कार को   " श्री बाण माताजी भक्त मंडल जोधपुर " के सदस्यों और मातेश्वरी के परम् आराधिका अनुराधा जी गहलोत ने माँ के सन्मुख रह कर यह चमत्कार देखा है । मन्दिर के ऊपरी भाग में

कालिका माताजी का मंदिर हैं जहा रावत जी स्वयं नवरात्रि में उदयपुर से आकर यहा मातेश्वरी की पूजा अर्चना करते है । मंदिर परिसर में यहा के बुढ़े बुजुर्गो ने बताया कि यहा एक नाग नागिन का जोड़ा भी रहता है , जिनमे नाग देवता के बड़ी बड़ी मुछे भी है , कई सालों से यह नाग नागिन का जोड़ा है लेकिन किसी को आज तक बिना कारण नुकसान नही पहुचाया ।
सलूम्बर में विराजित बाण माताजी युद्धों की देवी हैं , अक्सर युद्धों में जाते समय मेवाड़ की सेना एकलिंग जी का नाम लेकर युद्ध के लिए निकलती हैं  लेकिन  हरावल पँक्ति के हकदार चुण्डावत ख़ास कर चूण्डावतों का पाटवी ठिकाणा सलूम्बर में सर्व प्रथम अपनी कुलदेवी की आराधना युद्ध में साथ चल सहायता करने का आह्वान करते थे ।
वैसे तो बाण माताजी की हंस की असवारी हैं लेकिन  यहा मातेश्वरी की सिंह की असवारी है , बाण माताजी भक्तों का उद्धार करने वाली संकट हरने वाली मैया आपके श्री चरणों में प्रणाम ।

माँ से एक निवेदन : प्रणतानां प्रसीद त्वं देवि विश्वार्तिहारिणि।
त्रैलोक्यवासिनामीडये लोकानां वरदा भव || :-

विश्व की पीडा दूर करनेवाली देवि! हम तुम्हारे चरणों पर पडे हुए हैं, हम पर प्रसन्न हो ओ।
त्रिलोकनिवासियों की पूजनीया परमेश्वरि ! सब
भक्तो को वरदान दो |

दोहा :-
रण देवी थू दुरग देवी , भगत भूप घणा भाय ।
शगति सलूम्बर वाळी सुमरिया , कष्ट सब मिट जाय ।।

Tuesday, 16 February 2016

श्री बाण माताजी मंदिर दोलपुरा , प्रतापगढ़ ( राज.)

श्री बाण माताजी मन्दिर दोलपुरा , प्रतापगढ़ मे विराजमान श्री बाण माताजी 
मन्दिर की प्राण प्रतिष्ठा दो वर्ष पूर्व ही एकलिंग दीवान महाराणा श्री महेन्द्र सिंह जी और उत्तम स्वामी जी महाराज के सानिध्य में हुआ । 



विणती वरदायीनी मावड़ी , बायण सुणों पुकार।
द्वारे थोरे आविया , तारों तारणहार ।।

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